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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा के जल के अधिकतम उपयोग पर प्रारंभ से जोर दिया जाता रहा है। पूर्व वर्षों में अनेक नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल के लिए नर्मदा जल लाने का कार्य हुआ है। इस क्रम में आज प्रदेश में नर्मदा जल उपयोग के लिए 11 हजार 540 करोड़ रूपए लागत की 5 सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण कार्यों के लिए निविदाएँ स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। इन परियोजनाओं के निर्माण से लगभग 2 लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी और 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन भी होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में सम्पन्न नर्मदा नियंत्रण मण्डल की 75वीं बैठक में यह निर्णय लिए गए।
इस बैठक में जो निविदाएँ स्वीकृत की गई उनमें डिन्डौरी जिले की अपर नर्मदा 45 हजार 600 हेक्टेयर, होशंगाबाद जिले की दूधी 55 हजार 410 हेक्टेयर, नरसिंहपुर जिले की शक्कर-पेंच लिंक 95 हजार 839 हेक्टेयर, मण्डला जिले की बसानिया 8 हजार 780 हेक्टेयर एवं सीहोर जिले की डोबी 8 हजार 544 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की परियोजनाएँ शामिल हैं। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश के हिस्से के 2.223 एमएएफ नर्मदा जल का उपयोग सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने बरगी परियोजना की स्लीमनाबाद टनल का कार्य जून 2023 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। टनल के बाद निकलने वाली रीवा शाखा नहर के लिए भी दो ग्रुप में निविदाएँ स्वीकृत की गईं। इनसे 42 हजार 700 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा निर्मित होगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रदेश में नहरों के निर्माण में गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाये। भविष्य में भी ऐसे ही प्रयास हों। साथ ही समूह माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं, नर्मदा नदी के विभिन्न घाट के विकास कार्यों की पूर्णता और निर्माणाधीन कार्यों के निरंतर निरीक्षण भी किए जाएँ। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा, वन मंत्री विजय शाह, नर्मदा विकास घाटी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव नर्मदा घाटी विकास एस.एन. मिश्रा, अपर मुख्य सचिव वित्त मनोज गोविल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण नीरज मंडलोई उपस्थित थे।
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