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जहाँ एक तरफ लोगों को न्याय और सहारा देने के लिए कानून बनाये जाते है। वही दूसरी और कई लोग अपने फायदे के लिए इनका दुरूपयोग करते है। ऐसा ही कुछ मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाली 16 साल की लड़की ने किया है। 16 की बच्ची ने थाने में छेड़छाड़ की झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसे जेल भी भेज दिया। लेकिन इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने कोर्ट में नाबालिग लड़की को 9वीं की छात्रा बताया। और चालान डायरी में जिस स्कूल का नाम लिखा है उस स्कूल में नौवीं तक कक्षा है ही नहीं । उक्त स्कूल केवल 8वीं तक ही है। जब पुलिस ने छात्र से पूछताछ की तब उसने कहा की उसने ये सब उसके मामा के कहने पर किया था।कोर्ट ने ही पूरे मामले में पुलिस को गलत FIR दर्ज करने की बात कही। वकीलों ने बताया की 9 अप्रैल 2017 को 16 साल की नाबालिग छात्रा ने बंशी माधवानी के खिलाफ सराफा तहे थाने में छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था। छात्रा ने पुलिस को बताया की मिलन साड़ी की दुकान पर बंशी माधवानी ने उसका नाम-पता पूछ कर पहचान की। और इसके बाद वह उसे परेशान करने लगा। जिसके बाद पुलिस ने बंशी को गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया गया। उसके बाद थाने के सब इंस्पेक्टर नरेंद्र जैसवार द्वारा कोर्ट में चालान पेश किया गया। जानकारी के अनुसार छात्रा के मुंह बोले मामा पर मामी ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया है। और बंशी माधवानी इस केस में मामी की कानूनी मदद कर रहा है। और इसी रंजिश के चलते मामा ने बंशी के खिलाफ छेड़छाड़ की झूठी शिकायत दर्ज करने के लिए कहा। सेशन जज विशेष न्यायाधीश पावस श्रीवास्तव ने केस पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा की , ये पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग है। ऐसा करना ठीक नहीं है।
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