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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को आदेशित किया है कि 2014 से पहले रिटायर हुए कर्मचारी, हायर पेंशन का अधिकार रखते हैं। उनकी रुकी हुई पेंशन को फिर से शुरू किया जाए। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कर्मचारी भविष्य निधि हायर पेंशन विवाद से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई की और सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सन 2014 से पहले रिटायर हुए अधिकारी एवं कर्मचारियों को हायर पेंशन की पात्रता है अतः उनकी रोकी गई पेंशन फिर से शुरू की जाए। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, क्षेत्रीय कार्यालय, जबलपुर की ओर से एक खास पहल की गई है। संस्थान में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों-कर्मचारियों के त्वरित उपचार की दिशा में यह प्रयास हुआ है। संस्थान ने इस संबंध में शहर के सर्व सुविधायुक्त अस्पतालों से चिकित्सा-अनुबंध किया है। क्षेत्रीय आयुक्त क्रमांक-1 राकेश सहरावत ने बताया कि संगठन की सेवाओं से निवृत्त हुए लोगों एवं उनके आश्रितों को बेहतर एवं सरल चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने के लिए एक सकारात्मक पहल की गई है। इस पहल के अंतर्गत जबलपुर शहर में स्थित पांच बड़े एवं सर्वसुविधा युक्त अस्पतालों से शुक्रवार को कैशलेस अनुबंध किया गया। उन्होंने बताया कि अब तक कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों एवं पेंशनरों को सीजीएचएस से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में इलाज कराए जाने की अनुमति थी। इसके अनुसार सीएसएमए के प्रावधानों के तहत कर्मचारियों एवं पेंशनरों को चिकित्सा सुविधा बिल का भुगतान स्वयं करना होता था एवं बाद में कार्यालय में बिल जमा किए जाने पर खर्च की गई राशि का भुगतान कर्मचारी एवं पेंशनर को कार्यालय द्वारा किया जाता था। ताजा अनुबंधों के अनुसार शहर के नेशनल हॉस्पिटल, जबलपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मेट्रो हॉस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर, जामदार हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड एवं स्वास्तिक मल्टी स्पेशिलिटी हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में अब संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी अपना व परिजनों का उपचार करा सकेंगे। करार के वक्त क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त वर्ग-2 शुभम अग्रवाल, सहायक भविष्य निधि आयुक्त पीके प्रधान भी उपस्थित रहे।
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