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उज्जैन। सूर्यपुत्र शनि देव का 30 साल बाद स्वराशि में राशि परिवर्तन अमावस्या के साथ सूर्य ग्रहण के विशेष योग में आ रहा है। इसका हर राशि पर प्रभाव पड़ेगा।
ज्योतिर्विद अजयकृष्ण शंकर व्यास के अनुसार शनिवार, 30 अप्रैल को शनि कुंभ राशि में गोचर करेंगे। मकर और कुंभ राशियां शनि देव की अपनी राशि हैं। इन राशियों का स्वामी ग्रह शनि है। अप्रैल का महीना वैदिक ज्योतिष विक्रम संवत के नजरिए से बहुत ही खास महीना रहा। इस माह अब तक सभी 9 ग्रहों में से 8 ग्रहों का राशि परिवर्तन हो चुका है और अब 30 अप्रैल 2022 को सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले शनि ग्रह राशि परिवर्तन कर रहे हैं। ज्योतिष में सूर्यपुत्र शनि देव को न्याय और कर्म का देवता माना गया है। शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि मजबूत हैं तो वे उस व्यक्ति को हमेशा शुभ और अच्छे परिणाम देते हैं। वहीं अगर कुंडली में शनि कमजोर है व्यक्ति के जीवन में परेशानियां का सामना करना पड़ता हैं।
शनि को कलियुग का दंडाधिकारी माना गया है। इस वर्ष शनि ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही अहम माना जा रहा है। विक्रम संवत पंचांग के अनुसार शनि का राशि परिवर्तन।
30 साल बाद कुंभ राशि में शनि का गोचर
शनि का यह राशि परिवर्तन साल 2022 का सबसे बड़ा गोचर है। 30 अप्रैल 2022 को 30 साल के बाद दोबारा से शनि कुंभ राशि में आ रहे हैं। शनि के कुंभ राशि में परिवर्तन के बाद 05 जून 2022 को शनि वक्री चाल से भ्रमण करते हुए 12 जुलाई 2022 को फिर से मकर राशि में गोचर करेंगे। शनि पूरी तरह से अगले साल यानी 17 जनवरी 2023 को मकर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे जहां पर ये पूरे ढाई वर्षों तक इसी राशि में रहेंगे। कर्म फलदाता शनि पिछले करीब ढाई वर्षों से मकर राशि की यात्रा करते हुए शनिवार,30 अप्रैल 2022 की सुबह 9 बजकर 57 मिनट पर अपनी दूसरी स्वराशि कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही सभी राशियों पर अपना प्रभाव डालना शुरू कर देंगे। शनि के राशि परिवर्तन से वैसे तो सभी राशियों के जातकों पर शुभ.अशुभ दोनों तरह का प्रभाव पड़ेगा। इसी के साथ इस गोचर से देश और दुनिया में इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
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