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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने भर से उसकी सेवानिवृत्ति संबंधी राशि नहीं रोकी जा सकती। जब तक अदालत पुलिस चालान पर न्यायिक संज्ञान नहीं लेती, तब तक न्यायिक कार्यवाही लंबित नहीं मानी जाएगी। यह आदेश मुरैना के शासकीय कन्या महाविद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्या एवं प्रोफेसर डॉ. कमलेश श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
डॉ. कमलेश श्रीवास्तव वर्ष 2023 में सेवानिवृत्त हुई थीं, लेकिन 2015 के छात्रवृत्ति मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश का भुगतान रोक दिया गया था। हाईकोर्ट ने इसे अनुचित ठहराते हुए सरकार को 90 दिनों के भीतर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि तय समयसीमा में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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