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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जवल भुइयां ने भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में आयोजित जस्टिस जी.पी. सिंह मेमोरियल लेक्चर के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गंगा नदी पर नाव में चिकन बिरयानी खाने या इफ्तार करने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई गतिविधि अपराध नहीं है, तो उसके लिए लोगों को गिरफ्तार करना और महीनों तक जमानत से वंचित रखना कैसे उचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी राय व्यक्त करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि कई मामलों में अदालतों द्वारा जमानत के लिए ऐसी शर्तें लगाई जाती हैं, जो व्यक्ति की असहमति जताने की आजादी को सीमित कर देती हैं। उन्होंने छात्रों और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन के कारण लोगों को जेल भेजना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। साथ ही, उन्होंने 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'बुलडोजर न्याय' को असंवैधानिक ठहराने वाले फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि यह फैसला दो वर्ष पहले आना चाहिए था।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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