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मध्य प्रदेश में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा पदोन्नति नियमों को लागू करने में हुई एक तकनीकी चूक के कारण हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों पर डिमोशन (पदावनति) की तलवार लटक गई है। दरअसल, 'मप्र पदोन्नति नियम 2025' के तहत पदोन्नति प्रक्रिया 2025 से शुरू होनी थी, लेकिन अदालती मामलों के कारण इसे 2026 में शुरू किया गया। इसके बावजूद विभाग अभी भी 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के आधार पर ही पदोन्नति कर रहे हैं। नियमानुसार अगली विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) वर्ष 2027 के लिए होगी, जिससे वर्ष 2026 की डीपीसी पूरी तरह गायब हो गई है और लंबे समय से प्रभार पर काम कर रहे हजारों अधिकारी पदावनत होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीएडी को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने से पहले नियमों में संशोधन कर पूर्व की रिक्तियों के साथ 31 दिसंबर 2026 तक की रिक्तियों को शामिल करने का प्रावधान करना चाहिए था। इस प्रशासनिक उलझन के बीच, साइबर सेल ने प्रदेश में तेजी से फैल रहे ‘बॉस स्कैम’ (Boss Scam) को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। इस ठगी में जालसाज किसी कंपनी या विभाग के वरिष्ठ अधिकारी (बॉस) के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर कर्मचारियों से सामान्य बातचीत करते हैं और बाद में किसी आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे या फर्जी लिंक के जरिए धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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