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अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान से जुड़े कथित विवाद के बाद अब मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिरों की आय सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है। संत समाज, मंदिर से जुड़े पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि दोनों मंदिरों में आने वाले दान और उसके उपयोग का नियमित विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का संचालन श्रीजी मंदिर ट्रस्ट करता है, जबकि ममलेश्वर मंदिर का प्रबंधन समिति के माध्यम से किया जाता है। बताया जा रहा है कि ममलेश्वर मंदिर में हर माह दान पेटियां खोली जाती हैं, लेकिन आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया जाता। समिति के कुछ सदस्यों का भी कहना है कि उन्हें केवल जमा राशि की सामान्य जानकारी मिलती है, जबकि बैंक खाते, खर्च और अन्य वित्तीय विवरण साझा नहीं किए जाते। इसी वजह से संत समाज और विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय प्रतिनिधि भी आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने की मांग कर रहे हैं।
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में ओंकारेश्वर मंदिर की कुल आय 44.83 करोड़ रुपये रही, जबकि करीब 19 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ट्रस्ट के बैंक खातों में लगभग 65 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं। वहीं, मंदिर प्रशासन का कहना है कि ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों मंदिरों की दान पेटियां हर 15 दिन में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खोली जाती हैं, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और राशि मंदिर के अधिकृत खाते में जमा कराई जाती है। इसी धनराशि का उपयोग कर्मचारियों के वेतन और मंदिर परिसर के विकास कार्यों में किया जाता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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