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अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस के अवसर पर भी शहर में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग कम होता नजर नहीं आ रहा है। प्रतिबंध और जागरूकता अभियानों के बावजूद ट्रेंचिंग ग्राउंड पर प्रतिदिन पहुंचने वाले 35 से 40 टन कचरे में दो टन से अधिक पॉलीथिन निकल रही है। अनुमान है कि शहर में रोजाना उपयोग होने वाली प्लास्टिक का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सिंगल-यूज प्लास्टिक का है, जो पर्यावरण और स्वच्छता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
नगर निगम द्वारा लगातार चालानी कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अब तक 500 से अधिक लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और दो क्विंटल से अधिक प्रतिबंधित पॉलीथिन जब्त की गई है। इसके अलावा 'प्लास्टिक लाओ, चाय पीओ' जैसे अभियान के जरिए लोगों को कपड़े और कागज के थैले अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हालांकि फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि अधिकांश ग्राहक अपना थैला लेकर नहीं आते, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में पॉलीथिन का इस्तेमाल करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक कचरा केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। पशु चिकित्सकों के अनुसार आवारा गायों के पेट से कई बार 10 से 12 किलोग्राम तक पॉलीथिन, रस्सियां और अन्य अपशिष्ट सामग्री निकली है, जिससे उनकी पाचन क्षमता प्रभावित होती है और कई मामलों में उनकी मौत तक हो जाती है। नगर निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत ने नागरिकों और व्यापारियों से सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद कर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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