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मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी में सामने आए कथित फर्जीवाड़े के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मुरैना और भिंड जिले की सहकारी समितियों से जुड़े प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बिना फसल उत्पादन और कुछ मामलों में बिना वास्तविक पात्रता के किसानों के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में गेहूं खरीदी दर्शाकर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया। मामले में करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
मुरैना जिले में 10 सहकारी समितियों के 10 प्रबंधकों और 10 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नामजद आरोपी बनाया गया है। वहीं, जांच में अनियमितताएं मिलने पर 15 पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा दो तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जांच में यह भी सामने आया कि कई किसानों की जानकारी के बिना उनकी जमीन के नाम पर रिकॉर्ड में गेहूं बिक्री दर्ज कर दी गई, जबकि संबंधित भूमि पर या तो फसल नहीं थी या किसानों ने कोई उपज नहीं बेची थी।
भिंड जिले के लहार, रौन और मिहोना क्षेत्र की नौ सहकारी समितियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। यहां 23 संदिग्ध किसानों के मामलों की प्रारंभिक जांच के बाद कलेक्टर ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जिन बैंक खातों में कथित फर्जी भुगतान की राशि भेजी गई थी, उन्हें प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। साथ ही संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई के लिए जिला सहकारी बैंक को भी पत्र भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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