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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवानों के नाम सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे पर सियासी विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि शहीदों की जानकारी एक साल तक सार्वजनिक नहीं की गई और उन्हें समय पर सम्मान नहीं मिला। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक पुराने बयान का वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि उस समय सरकार को शहीदों की जानकारी थी, तो संसद में अलग बयान क्यों दिया गया, और यदि जानकारी नहीं थी तो यह भी गंभीर मामला है।
इन आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, 11 मई 2025 को तत्कालीन डीजीएमओ ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में छह शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्हें वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक की गई थी। भारतीय सेना और वायुसेना ने भी अलग-अलग अवसरों पर शहीदों को सम्मानित किया और उनके परिजनों का सार्वजनिक रूप से सम्मान किया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और सभी नाम उसी प्रोटोकॉल के तहत शामिल किए जाते हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि शहीदों को पहली बार अब सम्मान मिला है। सरकार ने दावा किया कि शहीदों के परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी निर्धारित सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई गई हैं तथा इस मामले में फैलाए जा रहे भ्रामक दावों का तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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