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सहकारी बैंक की बरमकेला शाखा में सामने आए 18.13 करोड़ रुपये के गबन मामले में अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की एंट्री होने जा रही है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद बैंक प्रबंधन ने शाखा प्रबंधक, लेखाधिकारी और लिपिक सहित कुल आठ कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। साथ ही मामले को आपराधिक जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिन में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी पूरे मामले की गहन पड़ताल शुरू करेगी।
प्रारंभिक जांच और विशेष ऑडिट रिपोर्ट में धान खरीदी, उठाव और उपार्जन केंद्रों से जुड़े वित्तीय लेन-देन में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और डीएमआर खातों के माध्यम से नियमों के विपरीत किए गए ट्रांजेक्शनों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटेंगी कि इन लेन-देन से किसे लाभ पहुंचा और इसमें किन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका रही। विभागीय सूत्रों का मानना है कि मामला केवल आठ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार प्रदेश के अन्य जिलों और सहकारी संस्थाओं तक भी जुड़े हो सकते हैं।
ईओडब्ल्यू की एफआईआर दर्ज होने के बाद बैंक रिकॉर्ड, खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि गड़बड़ियां केवल स्थानीय स्तर तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। विभागीय कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर ईओडब्ल्यू की जांच पर है, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले में नए खुलासे और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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