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शिवसेना (UBT) को संसद भवन में अपना मौजूदा कार्यालय खाली करना पड़ सकता है। संसद के नियमों के अनुसार, किसी राजनीतिक दल के पास संसद परिसर में कार्यालय बनाए रखने के लिए कम से कम पांच सांसद होना जरूरी है। छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे गुट के पास केवल चार सांसद (तीन लोकसभा और एक राज्यसभा) रह जाएंगे, जिससे उसकी पात्रता प्रभावित हो सकती है।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पार्टी के लोकसभा सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत बुधवार शाम लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सांसदों के विलय को औपचारिक मान्यता दिए जाने के बाद कार्यालय आवंटन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में पिछले चार वर्षों में यह दूसरी बड़ी बगावत है। हाल ही में पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद अलग होकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए। शिंदे ने इसे बालासाहेब ठाकरे के विचारों की रक्षा की लड़ाई बताते हुए अपनी शिवसेना को ‘असली शिवसेना’ कहा है। पार्टी में बढ़ती असंतोष की स्थिति के संकेत 14 जून को हुई संसदीय दल की बैठक में ही मिल गए थे, जिसमें कई सांसद अनुपस्थित रहे थे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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