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एमपी के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता: 7 साल की मेहनत से तैयार हुआ स्वदेशी ओट्स, आयात पर निर्भरता घटेगी
MP scientists: Indigenous oats , 7 years, mports to decrease.

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित गेहूं अनुसंधान केंद्र, पवारखेड़ा के वैज्ञानिकों ने सात वर्षों के शोध के बाद स्वदेशी ग्रेन ओट्स (दाना ओट्स) की नई किस्म विकसित की है। 2017 में शुरू हुए इस शोध के परिणामस्वरूप 2023 में JWGO-01 किस्म तैयार की गई, जिसे भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद किसानों तक पहुंचाया गया। इस उपलब्धि से भारत की ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील से होने वाले ओट्स आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के गुना और अशोकनगर क्षेत्रों में लगभग 2500 एकड़ भूमि पर इसकी खेती की जा रही है।

यह नई किस्म पोषण के लिहाज से बेहद समृद्ध मानी जा रही है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और स्वास्थ्यवर्धक तत्वों की पर्याप्त मात्रा पाई गई है, जो इसे हृदय रोगियों, मधुमेह के मरीजों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए उपयोगी बनाती है। अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक K K Mishra के अनुसार, कई खाद्य कंपनियां किसानों से इस स्वदेशी ओट्स की खरीद शुरू कर चुकी हैं, जिससे किसानों को नई आय का स्रोत भी मिला है।

ओट्स को दुनिया भर में एक सुपरफूड माना जाता है क्योंकि यह वजन नियंत्रित करने, पाचन सुधारने, कोलेस्ट्रॉल घटाने और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के नाश्ते में ओट्स का सेवन सबसे अधिक लाभदायक होता है। दलिया, स्मूदी, ओवरनाइट ओट्स, उपमा और चिल्ला जैसे रूपों में इसका सेवन किया जा सकता है। स्वदेशी ओट्स के उत्पादन में बढ़ोतरी न केवल किसानों के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि देश को पोषण सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी मजबूत बनाएगी।

 
Priyanshi Chaturvedi 23 June 2026

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