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एल नीनो का खतरा: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
Threat, El Niño: weak monsoon,  impact the economy.

प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो (El Niño) की परिस्थितियों ने भारत समेत दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यदि 2026 में एल नीनो का प्रभाव मजबूत हुआ, तो भारतीय मानसून कमजोर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश की धीमी शुरुआत ने पहले ही कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों को लेकर चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का सीधा असर खेती, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर दिखाई दे सकता है।

बारिश में कमी आने से धान, मक्का, सोयाबीन और दालों जैसी खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता घटेगी और खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, मानसून में 10 प्रतिशत की कमी से खाद्य महंगाई 2.5 से 3 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। टमाटर, प्याज, आलू, दूध और खाद्य तेल जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा।

कमजोर मानसून का प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है। किसानों की आय घटने से ग्रामीण मांग कमजोर होगी, जिससे ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य उद्योगों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। साथ ही, बढ़ती महंगाई के कारण Reserve Bank of India के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर सिंचाई व्यवस्था, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और मजबूत आर्थिक ढांचे के कारण भारत पहले की तुलना में ऐसे मौसमीय झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम है। अब जुलाई और अगस्त की बारिश ही तय करेगी कि एल नीनो का वास्तविक प्रभाव कितना गंभीर होगा।

 
Priyanshi Chaturvedi 23 June 2026

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