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स्पीड पोस्ट की देरी पर डाक विभाग दोषी, उपभोक्ता आयोग ने 8 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया
Postal Department ,Speed ​​Post delay; Consumer Commission

भोपाल में स्पीड पोस्ट सेवा में देरी का मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी माना गया। शिकायतकर्ता ज्योति शर्मा ने 12 जनवरी 2026 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था, जिसमें धार्मिक पुस्तक, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कपड़े शामिल थे। इसके लिए उन्होंने 1228 रुपये शुल्क अदा किया था, लेकिन सामान्य 2-3 दिन की बजाय पार्सल को गंतव्य तक पहुंचने में सात दिन लग गए।

मामले में खास बात यह रही कि उसी दिन भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिन में पहुंच गया, जबकि दूसरा पार्सल 19 जनवरी को डिलीवर हुआ। सुनवाई के दौरान डाक विभाग देरी का कोई ठोस कारण नहीं बता सका। उपभोक्ता आयोग ने कहा कि स्पीड पोस्ट जैसी प्रीमियम सेवा के लिए अतिरिक्त शुल्क लेने के बाद समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है और बिना उचित कारण देरी करना सेवा में कमी माना जाएगा।

जिला उपभोक्ता आयोग, भोपाल ने डाक विभाग को शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए तथा 3,000 रुपये वाद व्यय के रूप में, कुल 8,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने निर्देश दिया कि दो माह के भीतर राशि का भुगतान किया जाए, अन्यथा विभाग को इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

Priyanshi Chaturvedi 17 June 2026

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