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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच भारत ने उर्वरक (फर्टिलाइजर) की संभावित कमी से निपटने के लिए बड़ी रणनीति तैयार की है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव के कारण कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर सप्लाई पर असर पड़ा है। ऐसे में खरीफ सीजन से पहले भारत ने यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम तेज कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारत के दूतावास करीब 20 देशों में युद्धस्तर पर सक्रिय हैं और स्थानीय कंपनियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। रूस, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से संपर्क किया गया है। इसके अलावा मोरक्को, जॉर्डन और बेलारूस के साथ भी आयात बढ़ाने को लेकर बातचीत जारी है, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके।
अब तक सऊदी अरब, कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भारत की उर्वरक जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करते रहे हैं। इस क्षेत्र से करीब 30% यूरिया, 30% DAP और एलएनजी की आधी आपूर्ति होती है। ऐसे में मौजूदा तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है, लेकिन भारत सरकार वैकल्पिक स्रोतों के जरिए इस संकट को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश कर रही है, ताकि खरीफ फसलों की बुवाई पर कोई असर न पड़े।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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