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सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसे राजनीतिक विशेषज्ञ आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस मान रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्रिमंडल ने भीलट देव मंदिर परिसर में आयोजित इस बैठक में आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। यह कदम 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारत आदिवासी पार्टी को रतलाम जिले की सैलाना सीट पर सफलता मिली। पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा ने 2013 में एसटी सीटों पर 31, 2018 में 16 और 2023 में 24 सीटें जीतीं। मालवा–निमाड़ क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।
आने वाले दो साल मोहन सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं। सरकार को अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करना होगा, जिसमें लाडली बहना योजना के तहत हर माह 3000 रुपये देने का वादा शामिल है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बड़वानी में आयोजित “कृषक कल्याण वर्ष 2026” की बैठक का उद्देश्य किसानों को फायदा पहुंचाना था, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि आदिवासी किसानों को वास्तव में इससे क्या लाभ मिला और उनकी अपेक्षाओं पर सरकार कितनी खरी उतरी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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