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अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 50% तक लगाए गए टैरिफ ने भारत की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। दिसंबर 2025 में अमेरिका को भारत के निर्यात में गिरावट इसके संकेत दे चुकी है। चूंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, ऐसे में यह झटका देश के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है। इसी पृष्ठभूमि में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट बेहद अहम माना जा रहा है, जिसे ट्रंप-प्रूफिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों और विशेषज्ञों के मुताबिक बजट में निर्यात-आधारित विनिर्माण को मजबूत करने और एमएसएमई सेक्टर को सुरक्षा देने पर खास फोकस रहेगा। सरकार 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के जरिए सस्ते कर्ज और ब्याज सब्सिडी दे सकती है, वहीं छोटे निर्यातकों के लिए ऋण पर 85% तक सरकारी गारंटी की संभावना है। इसके अलावा ‘भारतट्रेडनेट’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और नौकरशाही बाधाएं कम करने की तैयारी है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें।
लंबी अवधि के समाधान के तौर पर बजट में रक्षा और हाई-टेक सेक्टर को भी अहम भूमिका मिल सकती है। जीई एफ414 इंजन, प्रीडेटर ड्रोन सौदे, एमआरओ हब की स्थापना और 1 लाख करोड़ रुपये के आरएंडडी फंड जैसे प्रावधानों से अमेरिका के साथ रणनीतिक व्यापार संतुलन साधने की कोशिश होगी। साथ ही, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे नए बाजारों में निर्यात बढ़ाने, क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और ईवी-एआई सेक्टर को मजबूती देने के ऐलान संभव हैं। कुल मिलाकर बजट 2026 से सरकार तात्कालिक राहत के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक व्यापार झटकों से सुरक्षित करने की दीर्घकालिक नींव रखने की तैयारी में है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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