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एशिया के सबसे बड़े रेलवे फ्लाईओवर का अप ट्रैक कटनी में शुरू हो गया है। इसके साथ ही इस व्यस्त जंक्शन पर रेड सिग्नल का इंतजार अब इतिहास बन गया है। झलवारा-कटंगी से मझगवां तक बने 33.40 किलोमीटर लंबे इस ग्रेड सेपरेटर से फिलहाल करीब 20 मालगाड़ियां गुजर रही हैं, जबकि आने वाले दिनों में 90 से 100 फ्रेट ट्रेनें बिना रुके निकलेंगी।
यह रेलवे वायडक्ट देश की सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, जिस पर बिजलीघर, फैक्ट्रियां और खनिज उद्योग निर्भर हैं। भारतीय रेलवे का यह सबसे लंबा पुल परियोजना है, जिसमें अप ग्रेड सेपरेटर का काम पूरा हो चुका है और डाउन ट्रैक का निर्माण तेजी से जारी है। अतिरिक्त लाइन से कटनी-बिलासपुर और सिंगरौली रूट को सीधा फायदा मिलेगा, साथ ही न्यू कटनी और कटनी मुड़वारा जैसे क्षेत्रों को बायपास सुविधा भी मिलेगी।
इस परियोजना से फ्रेट ट्रेन संचालन में बड़ा सुधार होगा। मालगाड़ियों की संख्या और गति बढ़ने से रेलवे को सालाना 300 से 400 करोड़ रुपये के ईंधन और परिचालन खर्च की बचत होने का अनुमान है। करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ग्रेड सेपरेटर में 676 पिलर हैं और इसकी लंबाई इतनी है कि एक साथ 50 मालगाड़ियां खड़ी हो सकती हैं—जो इसे एशिया का सबसे बड़ा ‘उड़ता जंक्शन’ बनाती है
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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