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UGC के नए इक्विटी नियमों को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच संसदीय समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद के लिए संसदीय समिति नहीं, बल्कि यूजीसी जिम्मेदार है, क्योंकि उसने समिति की अहम सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि झूठे मामलों में सजा हटाने या सामान्य वर्ग को सूची से बाहर रखने जैसे फैसले यूजीसी के थे, न कि संसदीय समिति के।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि यूजीसी भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा और उसके उदाहरण तय कर देती, तो इससे वंचित वर्गों को बेहतर सुरक्षा मिलती और फर्जी मामलों की संभावना भी कम होती। संसदीय समिति ने यही सुझाव दिया था, लेकिन उसे नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की पहल और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार व यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए ड्राफ्ट इक्विटी रेगुलेशंस जारी किए थे।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, यूजीसी ने समिति की कुल पांच सिफारिशों में से केवल तीन को ही स्वीकार किया। एससी, एसटी और ओबीसी का इक्विटी कमेटी में 50 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व और भेदभाव की विस्तृत परिभाषा तय करने जैसे अहम सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान अब यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को ही निकालना होगा, ताकि नियम प्रभावी, निष्पक्ष और दुरुपयोग से मुक्त हो सकें।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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