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कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर के उनके खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार करने और संसदीय जांच पैनल की वैधता को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एससी शर्मा की पीठ ने 8 जनवरी को सुनवाई पूरी की थी और अब शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं, तो राज्यसभा के उपसभापति सभापति की अनुपस्थिति में सभापति के कार्य क्यों नहीं कर सकते। अदालत ने जस्टिस वर्मा के तर्क को खारिज किया कि उपसभापति के पास किसी प्रस्ताव को खारिज करने की शक्ति नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1968 के न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत केवल स्पीकर और सभापति के पास किसी जज के खिलाफ प्रस्ताव को स्वीकार या खारिज करने की अधिकारिता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जस्टिस वर्मा ने RS डिप्टी चेयरमैन के प्रस्ताव खारिज करने को चुनौती नहीं दी। चूंकि लोकसभा स्पीकर और RS चेयरमैन दोनों ने प्रस्ताव पास नहीं किया, इसलिए जॉइंट कमेटी बनना संभव नहीं है। जस्टिस वर्मा की याचिका में स्पीकर की कार्रवाई और जांच समिति के नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे असंवैधानिक ठहराने से इंकार कर दिया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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