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अहमदाबाद में एक दंपति के बीच प्याज और लहसुन खाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि मामला तलाक तक पहुंच गया। पति ने पत्नी की खान-पान संबंधी पाबंदियों से परेशान होकर फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। अदालत ने मामला देखते हुए तलाक मंजूर किया और साथ ही पति को मेंटेनेंस देने का आदेश भी दिया। इसके खिलाफ पत्नी हाई कोर्ट पहुंची, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी।
दरअसल, दंपति की शादी 2002 में हुई थी। पत्नी स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़ी थीं और प्याज-लहसुन का सेवन नहीं करती थीं, जबकि पति और ससुराल वाले ऐसी कोई पाबंदी नहीं मानते थे। शादी के बाद खान-पान को लेकर लगातार विवाद बढ़ा और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि घर में अलग-अलग खाना बनाना पड़ा। परेशान होकर पत्नी अपने बच्चे के साथ मायके चली गई, जिसके बाद 2013 में पति ने तलाक की अर्जी दी। 8 मई 2024 को फैमिली कोर्ट ने शादी खत्म करने के साथ पति पर मेंटेनेंस की जिम्मेदारी तय की।
फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्ष हाई कोर्ट पहुंचे। महिला ने तलाक को चुनौती दी, जबकि पति ने मेंटेनेंस के आदेश पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान महिला ने स्पष्ट कहा कि उसे शादी खत्म होने से कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद जस्टिस संगीता विशेन और निशा ठाकोर की बेंच ने कहा कि महिला के बयान से स्पष्ट है कि तलाक के मुद्दे पर अतिरिक्त विचार की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट का फैसला कायम रखा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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