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संस्कारधानी जबलपुर शहर को कभी अपनी टिक-टिक और घंटों की आवाज से पल-पल का समय बताने वाली ऐतिहासिक घड़ियों की हालत खराब हो चुकी हैं। नतीजा घंटाघर में लगी सभी चार घड़ी बंद हो चुकी हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के ऐतिहासिक स्थल घंटाघर को सजाने-संवारने के साथ ही घड़ियों को सुधारने का काम करीब दो साल पहले शुरू किया गया था।जिसमें लाखों रूपए खर्च किए गए थे और घड़ियों के सुधार कार्य के लिए उड़ीसा से विशेष तौर पर कारीगर बुलवाए गए थे। जिसमें शर्त थी कि घड़ियों को बदला नहीं जाएगा। पुरानी घड़ियों को ही कारीगर ठीक करेंगे। लेकिन कुछ साल बाद घड़ियों के कांटे ने अपना दम तोड़ दिया और आज हालत यह है कि घंटाघर की चारों घड़ियां बंद हो चुकी है।घड़ी बनाने के दौरान दावा किया गया था कि घड़ी की टिक-टिक और घंटों की आवाज एक बार फिर शहर को पल-पल का समय बताने लगेगी। लेकिन जनता की उम्मीदों में पानी फिर गया। शहर की ऐतिहासिक स्मारक घंटाघर की चार घड़ियों पर एक कहावत भी बनी है। जिसे सुनकर लोग पुराने दिनों को याद करते हैं। 'घंटाघर में चार घड़ी, चारों में जंजीर टंगी, जब-जब घंटा बजता है, खड़ा मुसाफिर हंसता है'। घड़ियों से घंटे की गूंज सुनाई न देने से लोगों को कमी लग रही थी। लेकिन अब घड़ी ने भी समय बताना बंद कर दिया हैं।
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