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रायसेन के शांतिनाथ जिनालय में भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। समाज के प्रचार-प्रसार व्यवस्थापक राकेश जैन ने बताया कि जैन अनुयाइयों के 16वें तीर्थंकरश्री 1008 शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष तीन कल्याणक हुए है।तीर्थंकर, चक्रवर्ती और कामदेव तीन पद के धारक भगवान शांतिनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हस्तिनापुर उ.प्र. नगर में हुआ। उनके पिता विश्वसेन जी और माता अचिरा देवी जी थी। शांतिनाथ अवतारी थे। उनके जन्म से ही चारों ओर शांति का राज कायम हो गया था। वे शांति, अहिंसा, करूणा और अनुशासन के शिक्षक थे। जातिस्मरण से और दपर्ण में अपने मुख के दो प्रतिबिम्ब देखकर उन्हें वैराग्य भाव उत्पन्न हुआ था।आज ही के दिन उन्होंने हस्तिनापुर में दीक्षा ली, जिसको तप कल्याणक कहा जाता है। इन्होंने सम्मेदशिखर पर्वत पर तपस्या की और आज ही के दिन मोक्ष/निर्वाण को प्राप्त किया। तीन कल्याणक होने के कारण आज प्रातः से ही श्री शांतिनाथ जिनालय में भक्तों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई थी। इंद्र बनाकर विभिन्न बोली लेकर अभिषेक एवं शांतिधारा की गई महिलाओं द्वारा आरती गाकर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर समाज के राकेश जैन सौरभ जैन सहित समाज जन मौजूद थे।
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