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सुपर कॉरिडोर के 2 सेक्टर में 4 बगीचे एक पहचान कायम करेंगे। इन बगीचों में पौधे नहीं रोपे जाएंगे, बल्कि यहां पर 10-15 साल या उससे भी पुराने पेड़ों को लाकर लगाया जाएगा। खजराना, भंवरकुआं, फूटी कोठी और लवकुश चौराहा पर बनने वाले फ्लायओवर के कारण कटने वाले 4000 से ज्यादा पेड़ों को यहां ट्रांसप्लांट किया जाना है। फूटी कोठी चौराहा के कुछ पेड़ों को रिंग रोड के सर्विस रोड और ग्रीन बेल्ट में ट्रांसप्लांट किया जाएगा।भंवरकुआं ब्रिज के लिए करीब 700, खजराना के लिए करीब 1300, फूटी कोठी के लिए लगभग 2000 और लवकुश चौराहा पर 200 पेड़ ब्रिज निर्माण में बाधक हैं। आईडीए चेयरमैन जयपाल सिंह चावड़ा के मुताबिक सुपर कॉरिडोर के सी सेक्टर के बगीचे में इससे पहले 20 पेड़ों को शिफ्ट किया गया था। यहां देखभाल के लिए माली रखा गया है। ट्रांसप्लांट के बाद सारे पेड़ों ने वापस जड़ें पकड़ ली हैं।ब्रिज और रोड निर्माण के कॉन्ट्रैक्ट में ही यह शर्त अनिवार्य है कि एक भी पेड़ को काटा नहीं जाएगा। कॉन्ट्रैक्टर पेड़ों को ट्रांसप्लांट कराने की व्यवस्था करेगा। उधर, भंवरकुआं पर बनने वाले ब्रिज के लिए भी चौराहा से होलकर साइंस कॉलेज तक 200 पेड़ काट दिए हैं।खजराना पर कॉन्ट्रैक्टर ने जल्दबाजी में 400 से अधिक पेड़ों को ट्रांसप्लांट कराने के लिए अभी से आधा से ज्यादा काट दिया है। जब तक यह 400 पेड़ शिफ्ट नहीं होंगे, तब तक नए पेड़ की छंटाई नहीं की जाएगी। जो पेड़ काटे हैं, उन्हें सी और डी सेक्टर में शिफ्ट करेंगे।
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