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स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नक्सलवाद के साथ-साथ ऐसी विचारधारा पर भी निशाना साधा जिसे उन्होंने देश की प्रगति में बाधा बताया। इसके बाद कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
विपक्ष की ओर से सवाल उठाया गया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सरकार को रोजगार, महंगाई और अन्य जनहित के मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। वहीं भाजपा समर्थक पक्ष ने प्रधानमंत्री के बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा और विचारधारात्मक चुनौती से जोड़कर देखा। इस तरह भाषण का यह हिस्सा राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा तेज हुई। हालांकि प्रधानमंत्री के पूरे संबोधन में विकास, युवा, ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई विषय शामिल थे। ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है और आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और उठा सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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